**गुरु **
हमारे जीवन का सर्वप्रथम गुरु हमारी माँ होती है , जिनसे हम सब कुछ सीखते हैं। माँ ही हमें रिश्ते सँभालने, घर संभालना सिखाती हैं । मैनजमेंट (management ) सही मायने में सीखनी हो तो मम्मी जी से सीखनी चाहिए , किस तरह सब को मैनेज कर लेती है बिना किसी शिकन के । माँ हर situation का solution बड़ी ही आसानी से निकल लेती हैं इसलिए तो माँ हमारी दोस्त भी है जिनसे हम अपनी दिल की बात कर सकते हैं । जो झट से हमारे मुरझाये चेहरे को पढ़ लेती हैं।इसलिए हमें बड़े होने के बाद उन्हें इग्नोर नहीं करना चाहिए जिन्होंने अपना जीवन हमारे लिए व्यतीत कर दिया। हमें याद रखना चाहिए की बचपन में जब कुछ नहीं समझ आता था तो सौ बार एक ही सवाल बनती बार बार पूछते थे और हमेशा ही जवाब मिलता था किंतु आज के डिजिटल युग में जब हमारी माँ कुछ पूछती हैं कि यह कैसे ऑपरेट होगा तो अक्सर हम इर्रिटेट हो जाते हैं और बताना भी पसंद नहीं करते क्यूंकि हमारे पास फुरसत ही नहीं व्हाट्सप्प और फेसबुक से। हमें जरुरत है की हम अपनी माँ को फ्रेंड की तरह ट्रीट करें। जैसे बचपन में वो हमारी फ्रैंड बनती थी और हमें अकेला महसूस नहीं करने देती।
***love your Mom ***
***love your Mom ***
No comments:
Post a Comment