संतोष
यह शब्द हमें शान्ति देता हैं। पर आजकल संतोष किसी को भी नहीं शायद वक़्त ही ऐसा चल रहा है। पर हमें हर हाल में शुक्रियादा करना चाहिए भगवान् का, अन्नदाता का, माता -पिता का, दोस्तों का, न ही सिर्फ जानकार लोगो का बलकी जिन्होंने भी हमारी कभी सहायता की हो.।
संतोष कैसे मिल सकता है?
किसी कि सहायता कर के ना ही सिर्फ पैसे के ज़रिये बल्कि उसकी बात सुन कर समाधान निकल कर। उस व्यक्ति को कुछ सिख की कोई "हुनर" पर आजकल लोग सिर्फ दूसरे से फायदा ही उठाते हैं । पैसे की मदद तो कुछ दिन तक साथ देती है पर कोई हुनर अगर हम सीखा सकें तो हो तह उम्र काम आता है। किसी का पेट भर कर भी हमे तसल्ली होती है। सिर्फ मंदिरों की दान पेटी में पैसे चढाने से ही कुछ नहीं मिलता कभी लोगो की दुआ भी लगती है। और हमेशा सही रास्ते पर चले सही का साथ दें।
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